जीवन का सच किया है ?
भारत में आज कल गियान वियापी मस्जिद पर विवाद चल रहा है जिस में झगड़ा करने के बगैर, गियान १ % भी नहीं है। यह मंदिर है या कि मस्जिद है, इस बात का दो मूर्खों के दो धड़ों में झगड़ा है। इनको ना तो अपनी रोजी,शुद्ध और पौष्टिक रोटी,शुद्ध पानी,शुद्ध हवा, जरूरी कपडा,अपनी इलम[एजुकेशन] और एक सुविधा दायक सूंदर मकान,आने जाने के लिए गाडी, कमर तोड़ती महंगाई, अपनी सेहत,अपनी रोज़ाना जिंदगी,इसकी ख़ुशी की कोई फ़िक्र है। इनको सदिओं पहले किसी राम,किसी कृष्ण,किसी मोहमद,किसी नानक और किसी जीसस क्राइस्ट ने, इनको इस तरह हिप्नोटाइज कर दिया है ,जिन में से अब कोई भी इनकी सुध, बुध लेने के लिए,सिवाए उन के विचारों के किस्से कहती किताबों के, हाज़िर नहीं है, जैसे कि अब २०२४ का इलेक्शन जीतने के लिए, आज के सभ से बड़े और बेईमान और पोलिटिकल हिप्नोटाइज़र, आरएसएस के मोहन भगवत और बीजेपी के नरिंदर मोदी इन को लड़ा कर मरवाने का यतन कर रहे हैं। इन महँ मूर्खों को कुदरत या असिस्तव की और इनके जीवन की कोई साइंस और टेक्नोलॉजी,बायोलॉजी [विज्ञान] के बारे में कुछ भी पता नहीं है, इनकी बुद्धि का,इस दुनिया में आने के बाद, कोई भी विकास नहीं हुआ है,यह मूरख जन्मे थे और मूरख ही मर जाएंगे।
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