मेरी आत्मा।
मेरी आत्मा, मेरे प्राण के उड़ने वाले पवन/एयर /नाइट्रोजन, ऑक्सीजन और पवित्तर मॉइस्चर के पंछी रे,
तुझे में कैसे शुक्रिया करूं, तू ही तो मेरे खून में रच कर,मेरे दिल के पंप दवारा पंप किया गया मेरे शरीर के सारे सेलों का प्राण है।
ना जाने कब तक तू इस शरीर के फेफड़ों के आहलणे में बैठ कर तू मेरी सेवा करता रहेगा ,
और फिर तेरी मर्जी से इस अहलाने से उडारी मार कर एक दिन आकाशों के अट्मॉस्फेर/परम आत्मा में आज़ाद हो जाएगा।
राज यह है कि, जितनी देर पियार करते रहोगे इस पंछी से यह तुम में रह कर चहकता रहेगा,
नहीं तो एक दिन सताए हुए पंछी की तरह एक दिन उडारी मार कर यह निकल आज़ाद हो जाएगा।
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