Sunday, May 29, 2022

HAM/TUM KAUN HAEN ?

हम/तुम  कौन हैं ?

हम/तुम  हमारे अंदर की, भोजन की ऑक्सीडेशन से बनी अग्नि /गर्मी, मन/पानी  के भावों / भाफों से बने, हमारी आँखों के आंसूओं के मोती हैं,

जो पश्क्षियों की तरह, बादल बन कर,आकाशों में चहकते हुए, उड़ारियाँ भी लगते रहते हैं।  

वहाँ गरजते और बिजलियों से लिशकते भी हैं और किसी की मौत बन कर, कहीं गिरते भी हैं ,

फिर कुदरत के फ्रीजर से ठन्डे हो कर नीचे की और सवेरे सवेरे देऊ ड्रॉप्स बन कर ,बारिश और बर्फ के मोती और मनके बन कर धरती और इसके जीवों को जीवन देने के लिए, अपने को मिटा भी देते हैं। 

तुम ग्लासिएर्ज  में बैठे, बहते नदियों नालों में भी हो,झीलों में भी हो, और बहते सूंदर चश्मों में भी हो,

धरती की हरयाली में भी तुम ही हो,फलों और सब्जियों के रसों में और अनंत वस्पतियोन की शक्ति में भी तुम ही तो हो ,तुम आत्मा/अट्मॉस्फेर  की हवा और सभ जीवों को यह दुनिया दिखाते,रास्ते दिखाते,सभ कुछ मनन कराते 

,विचारते, समझाते और अनुभव कराते, सूर्य के सोने की तरंगों/किरणों  में,सितारों की झिल मिल में,ग्लेक्सियों के वर्तुल में, हर जगह वियापक, तुम ही तो हमारे सभ के प्राण अधारे हो।  

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