संयोग और वियोग ।
संयोग और वियोग सभ एक्सिस्टेंस की कुदरत की किरिया जिस को डेस्टिनी भी कहते हैं, पर निर्भर है। संयोग और वियोग कुदरत की दो अपोजिट लहरों का कुछ निर्धारित समें के लिए,कुदरत के कुछ निर्धारित पराक्रम के लिए ही मिलन है, फिर दोनों ने अपने अपने स्रोत में लौट जाना है।
No comments:
Post a Comment