कुदरत की होली।
हम तो होली मनाते हैं पानी में या पाउडर में मिले रंगों से ,पर कुदरत मनाती है अपनी होली अपनी रौशनी के नूर से जब यह मॉइस्चर के क्रिस्टलज में से गुजात कर, यह सात रंगों में बंट कर, एक इन्दर दानुष का रूप ले लेती है।
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