मेरे जज्बात।
इन हवाओं के मेरे प्राण और सवास हैं और मेरे मन के इन भावों /बादलों के मेरे आंसूं हैं,जो सूर्य की रौशनी से मोतियों की तरह चमकते हैं ,
मेरे को लोग भगवान्/परम आत्मा मानते हैं,पर में तो तुम सभ के ही अंदर की अनेक तरह के विचार करती,समझती और महसूस करती हुई एक हवा/आत्मा की तरह हूँ जो एक दिन इस माटी से बने शरीर को जमीन पर ही छोड़ कर आसमानों में उड़ जाएगी और नानक की सच्ची और पवित्र समझ अपने स्रोत, पवन ही गुरु में मिल जाएगी।
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