प्रकृति और असिस्तव ।
प्रकृति और असिस्तव ना तो हिन्दू है,ना बोध या जैन है ,ना मुस्लिम है,ना सिख है और ना ही क्रिस्चियन है । और यह सभ तो प्रकृति और असिस्तव से ही बने हैं। प्रकृति और असिस्तव को जानना और समझाना ही मनुष्य के लिए गियान और विज्ञानं का विषा है ना कि धर्मों के मूरखता पूर्ण, अटपटे सवालों और जवाबों और इनकी पूजा पद्धतियों में उलझ कर अपनी शक्तियों का बेअर्थ नाश करना है।
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