हम किया हैं ?
१, स्पेस /आकाश।
हमारे अंदर हमारे खाने,पानी/दराव हवा /गैस को जगह देने और इन का कंटेनर बनने के लिए खाली स्पेस /आकाश [होलो स्पेस ]हमे नाक/मुँह से,फेफड़ों से, लेकर हमारे पेट ,अंतड़ियाँ ,गुदा/पिशाब निकलने की नाली तक होती है।
२, हमारा ब्रेन और नर्वस सिस्टम।
हमारा ब्रेन और नर्वस सिस्टम हमारे शरीर का ऐसा कंप्यूटर है जो हमारी सभी मेमोरी रखता है ,विचार ,इच्छाएं ,कल्पनाएं ,ड्रीम और समझ /डिसिशन मेकिंग का काम करता है और हमारा नर्वस सिस्टम हमारे सभी सेलों की इनफार्मेशन,कमनीकेशन और हमारे बाहर और अंदर की सेंसेस रखता है। प्रकृति में निवास कर रही इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों को स्टडी करके प्रकृति के अनेक रहस्यों का पता करता है।
३, सूर्य की रौशनी ।
हमारी आँखों में सूर्य की रौशनी पल पल हमें इस असिस्तव के दर्शन कराती है,सभी रास्ते दिखाती है। हमारी चेतना का काम भी यही करती है।
४, हवा।
यह हवा हमें हमारे नाक से प्रवेश हो कर हमें पराण/ ऑक्सीजन / जीवन देती है,हमारे फेफड़ों में जा कर हमारे दिल के दवारा हमारे खून में मिक्स हो कर हमारे सभी सेलों को पोषण देती है। हमारे कानों से आ कर हमें मस्त धुनें सुनाती है। हमारे खून की सर्कुलेशन करती है,हमारे में विचार पैदा करती है और समझ पैदा करती है। हम सभी के बीच में कम्युनिकेशन करती रहती है और जोड़ती रहती है। हम सभी इसके धागे में पिरोए हुए माला के मोती हैं। यह हमारी आत्मा/प्राण बन कर हमेशा हमारे साथ जीवन भर मृत्यु तक रहती है। मृत्यु के टाइम यह हमें छोड़ कर अट्मॉस्फेरे /परम आत्मा में मिल जाती है।
५, पानी।
यह हमेशा हमारे अंदर के पदार्थ को तरल बना कर हमारे शरीर में घूमने और सेलों को भेजन देने का काम करता रहता है और हमारे शरीर की अंदर से शुद्धि करता रहता है।
६, खाना।
हमारे सारे शरीर के सेलों का पोषण और इनकी शक्ति इसीसे बनती रहती है जो हमारे जीने का मुख्या आधार है । खाना जितना पोषिक,सतुलित, हल्का और जल्दी पचने वाला हो उतना अच्छा है।
No comments:
Post a Comment