समाधान।
इस पृथ्वी पर हज़ारों सालों से ,बहुत धर्मों ने जनम लिया,बहुत अपने आप को भगवन,बुध , संत, महात्मा,रिफॉर्मर,फिलॉस्फर,और साइकोलोजिस्ट कहलवाने वाले महँ पुरष आए पर यह संसार जीवन के युद्धों,हमलों,कत्लों,धर्मों और जातियों के झगडे,गरीबी और अमीरी के फासलों के दुखों से नहीं निकल पाया। इस का मतलब है इंसान का मन नहीं बदला जिस के बगैर इस का और इस के वातावरण का बदलना ना मुमकिन है। इस के लिए इसके यूनिवर्सल मन को ही बदलने की कोई वैज्ञानिक/कुदरती तरकीब निकालनी पड़ेगी।
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