चिंतन।
ओ भोले भाले भारती,कभी आराम से बैठ कर विचार किया है ?
नीचे धरती के पानी को गरम करके, भाफ बनाके, बादल बनाने वाला कौन है ?
फिर यह बादलों को आकाशों में,उड़ा ले जाने वाली/वाला कौन है ?
और ऊपर आसमानों की ठण्ड से इनको ठंडा करके बरसाने वाला कौन है ?
इन बारशों से धरती पर हरियाली उगाने वाला कौन है ?
इस हरयाली से अनंत जीवों का भोजन बनाने वाला कौन है ?
इसी कुदरत के सिस्टम को प्रकृति कहते हैं ,
जो सभी प्राणियों में प्राण बन कर काम कर रहा है,सोच विचार करके समझ कर, अपने जीवन का निर्भाव कर रहा है।
ना तुम हिन्दू,ना तुम मुस्लिम,ना सिख ,ना तुम ईसाई,बुध या जैनी हो,ना तुम ब्राह्मण,ना कशात्री,ना वेश न ही शूदर हो, यह सभ धरम/सियासत की दुकानें हैं। तुम शुद्ध भारतीय इंसान हो,सभी से मिल जुल कर, प्रेम से विवहार करके एक दुसरे की सहायता से जीवन बिताना चाहिए और हिंदुत्व/मुसलम जैसे मूरख लोगों के झगड़ों के बहकावे में नहीं आना चाहिए।
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