में परम आत्मा [अट्मॉस्फेर] की वह इनविजिबल,इम्मोर्टल और ऐशवरीय [परम आनंदमई] हवा, बादलों को सागरों से उठा कर आकाशों में उड़ाए लिए ,वर्षा करती,पहाड़ों में बर्फ गिराते हुए,और सभी जीवों को स्वास/ प्राण देते हुए हर जगह विधमान और घूमती रहती हूँ । मुझे इन कलयुगी ब्राह्मण पुजारियों ,पाखंडी साधु संतों के हवन करने के पाखंडी और नॉन सइंटिफ़िक धन्दों ने और दौलत के अंधे पूंजीवादी और सरमाएदार इन्दुस्ट्रीअलिस्टों और इनकी सरकारों ने मुझे बे तहाषा कार्बन डाईऑक्साइड से गन्दा ही नहीं किया है मुझे यह लोग अंड षंड विचार/झूठ बोल कर और अपने नॉन साइंटिफिक प्रचारों से भी मेरा बलात्कार करते रहते हैं। में आदि यूनिवर्सल शक्ति इन कलयुगी दरिंदों को क्रोना जैसी बीमारियों ,आंधी, तूफ़ान और घोर बाषाओं की आपदाओं से तो सजा देती रहती हूँ ,लेकिन यह मूरख/ अंधे समझते ही नहीं। इन दौलत के लिए अंधे लालचियों को तो इतना भी पता नहीं है कि मेरी शुद्धता रखे बगैर किया इन का जीना संभव है या नहीं और कितनी देर ?
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