वह कौन है ?
ओ मेरे भोले भाले,बुद्धि हीन पर बहुत पियारे भारतवासियो, वह कौन है, जिस की हिन्दुओं/हिंदुत्व के षड यंत्र कारी ब्राह्मणों ने मंदिर बनवा कर, आम जनता को उलझाने,लड़ाने और मूरख बना कर लूटने के लिए,झूठी मूर्तियां बना कर,तस्वीरें बनाकर हाथों में डमरू पकड़ाया है और त्रिसूल को सजाया है,बाण और तीर और साइक्लोन चक्रों को चलाया है ? जिसने धरती के समुंदरों से आकाशों में उड़ कर अपना रूद्र रूप दिखाया है, वहां जोरों से तांडव मचाया है और अपने डमरू और बिजलियों की गर्जना से सभ को डराया है।जिसने उत्तरांचल में भी धरम के नाम पर अधरम करने पर, अपना गुस्सा निकाल कर भी दिखाया है। जिसने फिर पृथ्वी पर अपनी दया दिखाते हुए भूखे पियासे और गर्मी से विलकते जीवों को अपनी अमृत वर्षा से हरयाली पैदा करके प्रसन्न किया है और जीवनदान दिया है और जिसने ठुठराती सर्दियों में ऊपर से हमें मीठी मीठी गर्मी और रौशनी का प्रसाद भी दिया है।
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