में कौन हूँ ?
में इस पृथ्वी की सभ से ऊंचे परबत की चोटी एवेरेस्ट हूँ। मेरे सिर के ऊपर ग्लेशर्सज ही ग्लेसियर्ज [दिमाग] हैं। वहां सूर्य की गर्मी से ,ग्लैसर्ज की बर्फ ढल कर पानी का रूप लेने लगती है,और नदिओं [नाड़ियों ] का रूप लेने लगती है, जो आहिस्ता आहिस्ता नीचे आ कर दरिआओं का रूप ले जाती है जो अंत में समुन्दर में जा कर आराम लेते हैं। सूर्य बाबा फिर अपनी प्रचंड गर्मी से समुन्दर के पानी को बादल बना कर और आकाशों में लेजा कर वहां अनंत का तांडव मचाते हैं और बादलों और बिजलियों की गड़गड़ाहट से सभ को अपने होने का एहसास देते हैं और फिर अपनी प्रेसिपीटशन की किरिया से अमृत की बूंदों की वर्षा या बर्फ को बरसातते हैं। मेरा यही साइकिल इस पृथ्वी पर बायोकेमिस्ट्री और फिजिक्स के सिद्धांतों से जीवन पैदा करता रहता है जिस को बायोलॉजी कहते हैं। कभी कभी मेरे पृथ्वी सगरीर से आंतरिक गर्मी के विस्फोट होने से वोल्केनो [फोड़े] निकल आते हैं और बाहरी एटमोस्फियरिक और कॉस्मिक एनर्जीज के प्रेशर के इम्बैलेंस होने से भूचाल आते रहते हैं। मेरी यही सभ दुःख सुख की कहानी है जो मेरे खुद की जबानी है।
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