रोम रोम में रमने वाले।
इस धरती के और सभ जीवों के रोम रोम में रमने और बसने वाले रमना जी,
तुझे षत षत परनाम, कर दो भारत का कल्याण,साध लो अपना तीर कमान।
इन काले धन के व्यापारियों ने,जालिम और निर्दई शिकारियों ने ,भगवें कपडे धारे भेड़ियों ने ,
आम जनता का जीना कर दिया है हराम,सभ लूट लिया है देश का इन्हों ने,अब तुम पर ही है शरधा, कर दो कोई कल्याण कारी फरमान।
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