जीने की जरूरतें।
सभ से पहली जरूरत,रोटी,कपडा और मकान ,दूसरी जरूरत तंदरुस्ती की विद्या और इस की उपलभ्ती के लिए युकतिआं,तीसरी तरूरत कारोबार के लिए और अपनी समझ को बढ़ाने के लिए पढाई या विद्या। चौथी अपने जीवन के निर्वाह के लिए कारोबार,और फिर खुद समृद्ध होने के बाद जन सेवा का उपकार।
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