में भारत हूँ ।
में भारत ऐसा देश हूँ ,जिस में सदियों से, बाहर की ताकतें हमला करके अपना राज कायम करती आई हैं । इस कारन से कुछ थोड़े से शातिर,लालची और बेईमान लोगों के पास बहुत सारा धन है,दौलत है और बहुत सारे लोग गरीब हैं अनपढ़ हैं और शरीफ हैं । यहां गॉड,भगवान्,परमेश्वर,इश्वर,वाहेगुरु के नाम पर बहुत सारे लोग,अनपढ़ और मूरख लोगों को ठगने लगे हुए हैं । बहुत सारे लोग किस्मत को चमकाने और जीवन की मुश्किलों को जीतने के तरीकों का बिजनेस कर रहे हैं । इन सभ मूर्खताओं का कारन अनपढ़ता और गरीबी है । सिर्फ पढाई से ख़ास कर वैज्ञानिक पढ़ाई से ही इंसान में चेतना का विकास होता है जिस के बगैर किसी को भी मूर्खता के दायरे से निकलना बहुत मुश्किल है ।यहां के पॉलिटीशंज भी ज्यादा तर बेईमान,ठग,झूठे लोग ही हैं जो झूठे लारे दे कर लोगों से ठग्गी करते रहते हैं । यहां अंध विश्वाशों को लोग जयादा मानते हैं बजाए कि अपने आतम विश्वाश होने से ,कियुँकि कोई वैज्ञानिक चेतना नहीं है । लोग जयादा तर अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए पाठ, पूजाएं और प्रार्थनाओं में और ठग साधू संतों के चक्करों में फंसे रहते हैं और अपना टाइम और पैसे नष्ट करते रहते हैं ।
में भारत ऐसा देश हूँ ,जिस में सदियों से, बाहर की ताकतें हमला करके अपना राज कायम करती आई हैं । इस कारन से कुछ थोड़े से शातिर,लालची और बेईमान लोगों के पास बहुत सारा धन है,दौलत है और बहुत सारे लोग गरीब हैं अनपढ़ हैं और शरीफ हैं । यहां गॉड,भगवान्,परमेश्वर,इश्वर,वाहेगुरु के नाम पर बहुत सारे लोग,अनपढ़ और मूरख लोगों को ठगने लगे हुए हैं । बहुत सारे लोग किस्मत को चमकाने और जीवन की मुश्किलों को जीतने के तरीकों का बिजनेस कर रहे हैं । इन सभ मूर्खताओं का कारन अनपढ़ता और गरीबी है । सिर्फ पढाई से ख़ास कर वैज्ञानिक पढ़ाई से ही इंसान में चेतना का विकास होता है जिस के बगैर किसी को भी मूर्खता के दायरे से निकलना बहुत मुश्किल है ।यहां के पॉलिटीशंज भी ज्यादा तर बेईमान,ठग,झूठे लोग ही हैं जो झूठे लारे दे कर लोगों से ठग्गी करते रहते हैं । यहां अंध विश्वाशों को लोग जयादा मानते हैं बजाए कि अपने आतम विश्वाश होने से ,कियुँकि कोई वैज्ञानिक चेतना नहीं है । लोग जयादा तर अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए पाठ, पूजाएं और प्रार्थनाओं में और ठग साधू संतों के चक्करों में फंसे रहते हैं और अपना टाइम और पैसे नष्ट करते रहते हैं ।
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