मोदी जी का भाषण ।
मोदी जी का दिल्ली में भाषण एक मदारी का माझमा था । अगर जनता से प्रेम होता और उन की बातों में कोई सच होता तो कियूं नहीं उन्हों ने पहले टीवी से आ कर देश को सम्भोधन नहीः किया और अपनी सफाई दी कियूं उन्होंने इतनी देर तक दिल्ली के इलेक्शन आने तक इन्तजार किया ? जरूर इस में कोई चाल है । मोदी पर विश्वाश करना बहुत बड़े धोखे से कम नहीं है ।
मोदी जी का दिल्ली में भाषण एक मदारी का माझमा था । अगर जनता से प्रेम होता और उन की बातों में कोई सच होता तो कियूं नहीं उन्हों ने पहले टीवी से आ कर देश को सम्भोधन नहीः किया और अपनी सफाई दी कियूं उन्होंने इतनी देर तक दिल्ली के इलेक्शन आने तक इन्तजार किया ? जरूर इस में कोई चाल है । मोदी पर विश्वाश करना बहुत बड़े धोखे से कम नहीं है ।
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