में और तुम ।
में सूर्य हूँ और तुम समुन्दर का पानी हो,
में तुम्हें गरम करके भाफ बना कर बादलों की शकल में ऊपर उठा लेता हूँ,
फिर जहां चाहूँ पृथ्वी पर फेंक देता हूँ ,बारिश और बर्फ की शकल में ,
और फिर में अपनी तपस से घूमती हुई पृथ्वी पर हरे भरे जीवन का सर्जन करता हूँ ।
बुढ़ापे में में तुम्हारा रस सुका देता हूँ और तुम्हें हवा के हवाले कर देता हूँ,
जिस से तुम निर्जीव हो जाते हो और पृथ्वी से लिए तत्व फिर पृथ्वी में ही मिल जाते हैं ।
इस तरह में तुम्हारे जीवन चक्कर को निरंतर चलाता रहता हूँ,
और तुम्हारे किये हुए अच्छे और बुरे कर्मों का फल तुम्हें भला और बुरा देता रहता हूँ ।
मेरी किरणें जब तुम पानी के प्रिज्म से गुजरती हैं तो में सात रंगों में बदल जाता हूँ,
तुम महां मूरख लोग इन सात रंगों की मेरी मन की पींघ के भरम जाल को अपने अलग अलग धरम समझ लेते हो और आपस में लड़ते और मरते रहते हो ,
वास्तव में तो में सूर्य तुम्हारी चेतना की रौशनी, सिर्फ एक ही हूँ ,जैसे कृष्ण,जीसस,मुहमद,बुध,महावीर,कबीर,नानक और ओशो जैसे गियानिओं ने मेरा अधियात्मिक अनुभव किया है ।
में सूर्य हूँ और तुम समुन्दर का पानी हो,
में तुम्हें गरम करके भाफ बना कर बादलों की शकल में ऊपर उठा लेता हूँ,
फिर जहां चाहूँ पृथ्वी पर फेंक देता हूँ ,बारिश और बर्फ की शकल में ,
और फिर में अपनी तपस से घूमती हुई पृथ्वी पर हरे भरे जीवन का सर्जन करता हूँ ।
बुढ़ापे में में तुम्हारा रस सुका देता हूँ और तुम्हें हवा के हवाले कर देता हूँ,
जिस से तुम निर्जीव हो जाते हो और पृथ्वी से लिए तत्व फिर पृथ्वी में ही मिल जाते हैं ।
इस तरह में तुम्हारे जीवन चक्कर को निरंतर चलाता रहता हूँ,
और तुम्हारे किये हुए अच्छे और बुरे कर्मों का फल तुम्हें भला और बुरा देता रहता हूँ ।
मेरी किरणें जब तुम पानी के प्रिज्म से गुजरती हैं तो में सात रंगों में बदल जाता हूँ,
तुम महां मूरख लोग इन सात रंगों की मेरी मन की पींघ के भरम जाल को अपने अलग अलग धरम समझ लेते हो और आपस में लड़ते और मरते रहते हो ,
वास्तव में तो में सूर्य तुम्हारी चेतना की रौशनी, सिर्फ एक ही हूँ ,जैसे कृष्ण,जीसस,मुहमद,बुध,महावीर,कबीर,नानक और ओशो जैसे गियानिओं ने मेरा अधियात्मिक अनुभव किया है ।
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