Saturday, January 25, 2020

आरएसएस ।
आरएसएस के मोहन भगवत को सुन कर ऐसा लगता है कि संघ  एक फॅमिली के बजुर्ग की तरह बात करते हैं जो अपनी फॅमिली को अपने विचारों के मुताबिक चलाना चाहते हैं,जैसे पुराने ज़माने में होता था,इस में डेमोक्रेसी की झलक नजर नहीं आती । दुसरे जो वह बोलते हैं और जैसा उनकी बीजेपी सरकार उन के बोलों को शाक्षात लागु करने में आम लोगों से विवहार करती है उस में जमीन आसमान का फरक है । 


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