Wednesday, January 22, 2020

परम आत्मा ।
धर्मों में बंटे और परम आत्मा के नाम पर पागल हुए लोगो, अगर तुम्हारी आँखें सलामत हैं तो अपनी दृष्टि आकाश की तरफ उठाओ और जो भी तुम्हें जमीन और आकाश के बीच में अनुभव हो उसी का नाम ही तुम्हारे अंदर रह रही आत्मा,दिख रहे परम आत्मा का अंश है । यह ईंटों पथरों से बने मंदिर ,मस्जिद,गुर्दवारे,गिरजे और इन में पड़ी हुए गरंथ  आदि सभ सिर्फ तुम्हारे मन को लुभाने के जरिये  हैं । यह अगर हवा ना होती तो हमारी स्वास भी ना होती और हम भी ना होते और यह आत्मा और परम आत्मा की बातें भी ना होतीं । इस दुनिया में सभ धंदे के सिवा कुछ भी नहीं चल रहा है  ।

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