सिधि का सच ।
जैसे बारिश हुए बगैर और फिर सूर्य की धुप लगने बगैर खेती होती नहीं ,
ऐसे ही खाना खाए बगैर और फिर धुप चमके बगैर कल्पना सिद्ध होती नहीं ।
जैसे बारिश हुए बगैर और फिर सूर्य की धुप लगने बगैर खेती होती नहीं ,
ऐसे ही खाना खाए बगैर और फिर धुप चमके बगैर कल्पना सिद्ध होती नहीं ।
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