यह ठग्गों और गुंडों की दुनिया।
इस दुनिया का दिखने वाला चेहरा कोई और है पर वास्तविक मन का छुपा हुआ चेहरा कोई और है,
यह महँ तियागी,साधू, संत और मसीहा दिखने वाले राष्ट्र प्रेमी सभ बेईमान और चोर हैं,इनके अंदर बैठा मन कोई और है।
पोलिटिकल पावर,धन और झूठी शुह्रत की हवस के नशे का गुबार इन के सिर- दिमाग पर इस कदर चढ़ कर छा गया है ,
कि अहंकार का गुबार ही बम की तरह फट कर नष्ट होने को तैयार है, यही इन माया धारी प्रेमियों का दौर है और अंत है।
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