कुदरत के एवोलुशन की बदलती हुई धारा।
कुदरत के एवोलुशन की बदलती हुई धारा को जो ना समझ पाएगा,
वह पछड़ा हुआ अनपढ़ इंसान, कभी अपनी गलती को माफ़ नहीं कर पाएगा।
यह आरएसएस जैसे पुराने और बे तुके पछड़े टाइम को पसंद करने वाले लोग ,
ऐसे ही लड़ खडाते हुए नए युग धारा में बह कर मर जाएंगे,कभी कोई कुदरत की इस धारा को रोक नहीं पाएगा।
यह धर्मों की आड़ में अपने समाजों को पीछे की तरफ खींचने वाले इस बदलती हुई दुनिया से बहुत पीछे रह जाएंगे,
दुनिया आगे की तरफ दौड़ती जाएगी और यह लोग अपने पुराने वकत के झूठे राग गाते मिट जाएंगे।
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