रब कहाँ है ?
रब है तेरा तेरे पास कोई दूर नहीं है,रब है तेरा प्राण कोई होर नहीं है ,
रब है तेरे चारों और, जिस में से तू ले रहा हर सवास है ,रब है तेरा प्राण कोई और नहीं है।
रब है तेरी नजर जो देख रही सभ संसार है,रब हैं तेरे कान जो सुन्नते हर किस्म की आवाज हैं ,
रब है तेरी जीभ जो रस ले रही हर सवाद है ,रब है तेरा ब्रेन और नर्वस सिस्टम जो अनुभव कर रहा
हर दुःख सुख की पहचान है।
रब है तेरा हर सेल जिन का यह शरीर का मंदिर , गुरुदवारा बना है ,
रब है तेरा रकत जो इन सभी सेलों में घूम कर जीवन दे रहा है।
पगले रब तू ही तो है और कोई नहीं ,कियूं तू मारा मारा फिर रहा है ,
इसी रब को तू खुश करके रख, कियूं ईंटों पथरों के निर्जीव मदिरों को पूजता फिर रहा है।
रब की सारी शक्तियां कुदरत की तेरे साथ हैं,चारों तरफ उनकी ही बहार है,
यह धरम सथल तो धरम के पुजारियों और ठेकेदारों ने तेरे को लूटने के लिए बनाए हुए हैं।
No comments:
Post a Comment