सच।
इस बहती हुई असिस्तव की सच्ची धारा में, एक दिन यह खाते,पीते,जागते ,झूमते सोते,चहचहाते,चलते,फिरते,उड़ते जीवन इस जमीन पर गिर कर नष्ट हो जाएंगे,पर यह बादल,यह हवाएं,यह बारिशें ,यह तूफ़ान,यह तपतपाती सूर्य की धुप और कंपकंपाती ठण्ड,यह दिन रात,बदलती रुतें,यह नदियाँ,नाले,चश्में बहारें ऐसे ही चलते रहेंगे,लेकिन हम इस दशा में ना रहेंगे।
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