संतुलन ही जीवन है।
पानी जब भी सूर्य की गर्मी से भाप बन, कर बादलों में उड़ जाएगा ,
आकाशों में फैल कर सूर्य से आ रही रौशनी को रोक पाएगा,अँधेरा कर पाएगा।
जब अब भी सूर्य अपनी इंतहा गर्मी से पानी को पृथ्वी से उड़ा पाएगा,काल इस पृथ्वी पर छा जाएगा,
इस लिए अति हर किस्म की, अच्छी नहीं है इस जहां में,संतुलन बिगड़ कर सभ नष्ट हो जाएगा।
ऐ हिटलर के वंजिश हुकमरानों कुछ अपनी हिटलरशाही पर अंकुश लगाओ,
नहीं तो यह हरा भरा,अनेक रंगों से भरा खूबसूरत आशियाँ उजाड़ जाएगा।
अगर अपने जीवन को सूंदर बनाना है तो कुदरत के संतुलन की साइंस को समझना पड़ेगा,
नहीं तो इंसानियत का धरम मिट कर, पाखंडों का धरम इस पृथ्वी पर फैल कर सचाई को नष्ट कर देगा।
ऐसे ही हमें अपने शरीर की गर्मी और ठंडक में सतुलन बनाना सीखना होगा,
नहीं तो ब्लड प्रेशर का संतुलन बिगड़ कर दिमाग और सेहत के संतुलन को नष्ट कर देगा।
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