हमारा असली मंदिर।
हमारा शरीर ही हमारा पाठ और पूजा करने का असली मंदिर है,इसमें बैठ कर परम शान्ति का अनुभव करले,जिसका नाम ही परम आत्मा है, कहीं और दर ब दर भटकने की जरूरत नहीं है ,
यह मन की इच्छाओं और भावनाओं के रहने कीऔर इनकी सिद्धि के लिए मनन और मन की साधना करने की, बादलों और आत्मा की हवाओं की चादर ओढ़े सूंदर हड्डी, मॉस और खून की, आकाश के नीचे बनी झोंपड़ी और गुफा का मंदिर है।
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