कुदरत।
बादल आएँगे और जाएंगे,
कुछ बारिश भी कर जाएंगे।
इस धरती के जीवन की पियास बुझा जाएंगे,
फिर सूरज चमकेगा,गर्मी सताएगी,बारिश को फिर तरसेंगे।
जीवन ऐसे ही चलता जाता है ,
समां गुजरता जाता है,यही तो जीवन कहलाता है।
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