भगवान् दर्शन ।
भगवान् के सिस्टम [सर्किट] को देखना है तो उसके पुर्जों पर निगाह डालिये,
धरती से अन्न पैदा होते हुए,समुन्दर से भाफ के बादल उठते हुए और बारिश करते हुए,सभ की पियास भुजाते हुए ,
अट्मॉस्फेर की हवा चलते हुए,सभी प्राणियों को प्राण की स्वास देते हुए,और एक जगह से दूसरी जगह आवाज भेजते हुए,
और सूर्य की रौशनी और तपस से यह असिस्तव दिखाते हुए,समुन्द्रों से बादल उठाते हुए,बारिश करते हुए।
इन सभी यंत्रों से मिल कर जो जीवन मरण का चक्कर चल रहा है यह किया है ?
आंखों वालों को तो यह सभ नज़र आ जाना चाहिए ,समझने के लिए थोड़ी बुद्धि और अवेयरनेस चाहिए,किसी धरम को आ कर समझाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए और भोले भाले लोगों को धर्मों की आड़ में ठगने से बचना चाहिए।
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