हमारा ही जीवन किया है ?
जो हमारे ख्यालों में विचार और इमेजिनेशन बन कर आता है,हमें इस सृष्टि के बारे में समझाता है,नई नई ईजादें करवाता है, खून बन कर हमारी धमनियों में बेहता है,जो नाक से प्रवेश करके,सभी शरीर के सेलों के प्राण ऑक्सीजन की सप्लाई करता है,जिसके बगैर एक मिंट भी जीना मुश्किल है, पौदों में प्रोटीन बन कर हमारी खुराक बनता है,सारी श्रिष्टि को जीवन देने के लिए बारिश का पानी देता है, हमारी आँखें होते हुए भी जिस सूर्य की रौशनी के बगैर अन्धकार ही अन्धकार है वही इन सभी जीवन दाई ततुओं जैसे,पृथ्वी [भोजन],पानी,हवा,अग्नि [थर्मल शक्ति ]और रौशनी का मिश्रण ही तो वह है, जिसको तुम धार्मिक और स्पिरिचुअल लोगों ने पाखंड बना कर भोले भाले लोगों को अलग अलग नामों से पुकार कर,बेवकूफ बना कर, ठगने का धंदा चलाया हुआ है। साइंस ही सिर्फ इस सचाई का पर्दा पाश कर रही है बाकी तो सभ धरम के नाम पर,धरम के ठेकेदारों ने, सदियों से , लूट का धंदा चला रखा है।
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