भगवान् किया है ?
जो पौदों में पत्ते ,फूल और फल लगाए,
जो हर रोज मेरी सुबह बन के आए।
जो मुझे भोजन,पानी और हवा दिलाए,
आकाशों से बारिश बन धरती की पियास बुझाए।
वही प्रीतम तो मेरे प्राणों की पियास बुझाए,
वही तो मेरा अर्धांग्नी बन मेरा जीवन चलाए
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