धरम और आधियात्मिक गियान ।
धरम किसी दुसरे के अनुभव करके, कहे हुए विचारों को अपने मन दवारा, ग्रहण करने और उन के मुताबिक अपने जीवन का निर्वाह करने का नाम है, जब कि आधियात्मिक गियान खुद अनुभव करके अपनी चेतना के मुताबिक जीवन निर्वाह करने का नाम है,आधियात्मिक आदमी किसी और कि नक़ल नहीं करता बल्कि अपना खुद के अनुभवों दवारा अपने विचार रखता है ।
धरम किसी दुसरे के अनुभव करके, कहे हुए विचारों को अपने मन दवारा, ग्रहण करने और उन के मुताबिक अपने जीवन का निर्वाह करने का नाम है, जब कि आधियात्मिक गियान खुद अनुभव करके अपनी चेतना के मुताबिक जीवन निर्वाह करने का नाम है,आधियात्मिक आदमी किसी और कि नक़ल नहीं करता बल्कि अपना खुद के अनुभवों दवारा अपने विचार रखता है ।
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