Wednesday, April 6, 2022

PARAM ANAND SAGAR.

 परम आनंद सागर। 

में परम आनंद सागर हूँ,बादल  बन कर आकाशों में उड़ जाता हूँ, जी भर कर आनंद लेता हूँ,

वहां से फिर अमृत बूँदें बन कर, बारिश के रूप में इस धरती मां की गोद में आ कर आराम करता  हूँ। 

ना में ही हिन्दू, ना में मुस्लिम, ना में सिख, ना में बोधि या जैनी हूँ,ना ही में  कोई होर  इस दुनिया का मूर्खता पूर्ण धरम हूँ,

यह तो मूर्खों की लड़ने के बहाने के लिए , डाली हुई डिवीजीएनज  हैं ,में तो तुम सभी जीवों के अंदर, ७० % तुम्हारे शरीर का हिस्सा हूँ । 

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