पवन।
पवन ओ पवन,तू है हर जगह रमन,करती हर प्राणी का चलन,
तू है आगे भी पीछे भी,दाएं भी और बाएं भी ,ऊपर भी और नीचे भी।
तू रूकती नहीं ,थकती नहीं ,करती है सेवा हर दम,कभी सोती नहीं ,
तू न हो तो,कोई बोले नहीं ,कोई गए नहीं,नाडियों में खून बहे नहीं।
इसी लिए तो तेरे को शक्ति की धारा कहते हैं,आत्मा कहते हैं, सभी प्राणियों का प्राण कहते हैं ,
तेरे साथ ही रौशनी और बिजली जैसी शक्तियां भी जुडी है तू महान है ,सभी जीवों की जान है।
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