धरम एक बहुत बड़ा धोखा।
धरम चाहे हम कितने बनालें ,पर कोई भी इस मन पर काबू पा नहीं सकता ,
सभ झगडे और दुःख हैं मन के कारण ही , कोई इन्हों से बच नहीं सकता ।
हर इंसान की साइकोलॉजी, अलग अलग पाई जाती है ,
इसी लिए तो यह जिंदगी, एक गुंझलदार बुझारत सी समझी जाती है।
आओ अपनी मस्ती में, हस खेल कर,प्रेम से, इस बहु मूल्य जिंदगी को बसर कर दें ,
नहीं तो यहाँ कुछ मिलने,पाने वाला नहीं है कहीं ऐसे ही न अपनी मूर्खता में, इसे बर्बाद कर दें।
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