Sunday, April 24, 2022

DHARAM EK DHOKHA.

 धरम एक धोखा। 

धरम चाहे हम कितने बनालें ,पर कोई भी इस मन पर काबू पा नहीं  सकता ,

सभ झगडे और दुःख हैं मन के कारण ही , कोई इन्हों से बच नहीं सकता ।  

हर इंसान की साइकोलॉजी, अलग अलग पाई जाती है ,

इसी लिए तो यह जिंदगी, एक गुंझलदार बुझारत सी समझी जाती है। 

आओ अपनी मस्ती में, हस खेल कर,प्रेम से, इस बहु मूल्य  जिंदगी को बसर कर  दें ,

नहीं तो यहाँ कुछ मिलने,पाने  वाला नहीं है कहीं ऐसे ही न अपनी  मूर्खता में, इसे बर्बाद कर दें। 


No comments:

Post a Comment