में कौन हूँ ?
में हवा,पानी, रौशनी और दूसरी कई तरह की यूनिवर्सल रेडिएशंज़ का मिश्रण हूँ ,में इस स्पेस में ,हर जगह और हर प्राणी में रहता हूँ,
मेरे बगैर ना कोई बोल सकता है,ना खा पी सकता है,ना सुन सकता है ना देख सकता है ,ना सोच विचार कर सकता है, ना समझ सकता है, ना ही महसूस कर सकता है, ना ही ब्लड सर्कुलेट कर सकता है, ना ही भोजन पचा सकता है और ना ही टट्टी-पिशाब कर सकता है,मतलब शरीर की कोई भी किरिया नहीं हो सकती है और हर प्राणी मर जाता है। इसी करके मेरे को धार्मिक लोग जो साइंटिफिक बुद्धि नहीं रखते, मेरे मौत करने के डर के कारन, अनेक अपने ही मन पसंद नामों से,जैसे वाहिगुरु,भगवान् परमेशर,पर्भू,रब,अल्लाह,खुदा,गॉड आदि से पुकारते रहते हैं पर मेरे को मेरे असल रूप में नहीं पहचानते ,कियुँकि में तो नज़र नहीं आता और एनर्जी, भावना,रौशनी,रेडिएशन रूप में ही इस सारी स्पेस में रहता हूँ।
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