Friday, April 8, 2022

GURU NANAK BAANI SAAR.

 गुरु नानक बानी सार। 

इक ऊँकार सत्य नाम , करता  पुरख, निर्भाव निर्वैर ,अकाल मूरत,अजूनि से भांग,गुर प्रसाद जप। 

अर्थ-इक ऊँकार [जो पर्भू दी लगातार २४ घंटे , अजपा जाप दी सुनाई देन वाली साउंड है ] ही पर्भू का सच्चा  नाम है ,सभ काम  करन करावन  वाली शक्ति [ अंग्रेजी विच वर्क डन एनर्जी ] है। यह शक्ति  निर्भाव  यानि बगैर मन से  ,बगैर किसे नफरत या दुश्मनी के भाव  से मुकत  है और जनम मरण के चक्कर से मुकत है, गुर यानि पवन/हवा यानि अपनी नार्मल रेस्पिरेशन [सवास किरिया ] किरिया को जप यानि धियान पूर्वक लेते  रहो। यह हु ब  हु  महात्मा बुध की हज़ारों साल पहले की चली आ रही सर्वोत्तम मैडिटेशन विपासना का ही नया और दूसरा सवरूप है। लगता है जैसे गुरु नानक के जात पात रहित,सर्वधर्म प्रेम  और जीवों के प्रति  अहिंसा और प्रेम के विचारों को देखते हुए बुध का ही नया अवतार हो । 

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