अंध विश्वाश ।
खा गया है देश मेरे को,अंध विश्वाश बुरी तरह से ,
कोई गियान इन को नहीं है जीवन की साइंस का ।
लगे हुए हैं मंदिरों,मस्जिदों,गुरुदवारों और चर्चों में,
एक अपने मन की कल्पना के भगवान् की पूजाएं करने में ।
तुम्हारे हर तरफ असली भगवान् का पसारा है ,
उसी से तो तुम अपने सवास के लिए ऑक्सीजन ले रहे हो ।
खा गया है देश मेरे को,अंध विश्वाश बुरी तरह से ,
कोई गियान इन को नहीं है जीवन की साइंस का ।
लगे हुए हैं मंदिरों,मस्जिदों,गुरुदवारों और चर्चों में,
एक अपने मन की कल्पना के भगवान् की पूजाएं करने में ।
तुम्हारे हर तरफ असली भगवान् का पसारा है ,
उसी से तो तुम अपने सवास के लिए ऑक्सीजन ले रहे हो ।
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