आदिवासी और प्रकृति ।
प्रकृति किसी भी धरम से ऊपर है । ब्राह्मणों के शातिर और षड आंतरकारी मन से पैदा हुआ धरम और भगवान मिथिया है कोई भगवान कहीं भी नहीं है, हर तरफ सिर्फ प्रकृति ही है,जिस को विज्ञान तल पर असिस्तव भी कहते हैं । मूरख है मोहन भगवत जिस को जानवरों का डॉक्टर होते हुए खुद जानवर ही बन गए हैं । इस लिए प्रकृति को जीवन का आधार समझते हुए आदिवासी ही ठीक हैं ,मोहन भगवत इंसान नहीं हैं,हैवान हैं ।
प्रकृति किसी भी धरम से ऊपर है । ब्राह्मणों के शातिर और षड आंतरकारी मन से पैदा हुआ धरम और भगवान मिथिया है कोई भगवान कहीं भी नहीं है, हर तरफ सिर्फ प्रकृति ही है,जिस को विज्ञान तल पर असिस्तव भी कहते हैं । मूरख है मोहन भगवत जिस को जानवरों का डॉक्टर होते हुए खुद जानवर ही बन गए हैं । इस लिए प्रकृति को जीवन का आधार समझते हुए आदिवासी ही ठीक हैं ,मोहन भगवत इंसान नहीं हैं,हैवान हैं ।
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