भगवान् किया है ?
हमारा शरीर तो एक रोबोट की तरह एक आर्गेनिक माटी से बना यंतर है जो बिजली की शक्ति से जीवंत होता है या चलता है जैसे हमारे शरीर को भोजन की गर्मी,पानी के इसके नियंत्रण और हवा के परवाह और सूर्य की शक्ति से चलने, फिरने,बोलने,सुनने,सूंघने,स्वाद लेने,आनंद लेने ,सोचने,समझने,एक्शन में आने और काम करने का बल मिलता है । इस धरती से ले कर आकाश तक सारी स्पेस अनंत सलेक्ट्रोमग्नेटिक शक्ति की अनंत लौ से हाईएस्ट फ्रीक्वेंसीज की वाईब्रेशंज की शक्तियों से भरी पड़ी है । इस सारी एक्जिस्ट कर रही विवस्था का नाम ही भगवान् है ।
हमारा शरीर तो एक रोबोट की तरह एक आर्गेनिक माटी से बना यंतर है जो बिजली की शक्ति से जीवंत होता है या चलता है जैसे हमारे शरीर को भोजन की गर्मी,पानी के इसके नियंत्रण और हवा के परवाह और सूर्य की शक्ति से चलने, फिरने,बोलने,सुनने,सूंघने,स्वाद लेने,आनंद लेने ,सोचने,समझने,एक्शन में आने और काम करने का बल मिलता है । इस धरती से ले कर आकाश तक सारी स्पेस अनंत सलेक्ट्रोमग्नेटिक शक्ति की अनंत लौ से हाईएस्ट फ्रीक्वेंसीज की वाईब्रेशंज की शक्तियों से भरी पड़ी है । इस सारी एक्जिस्ट कर रही विवस्था का नाम ही भगवान् है ।
No comments:
Post a Comment