विश्व गुरु या विश्व कर्मा ?
हम भारत वासी हमेशा से विश्व गुरु बनने की [सिर्फ बोलने वाले,कथाएं करने वाले,बड़बोले,मियाँ मिठू और गप्पी ] इच्छाएं रखते रहे हैं ना कि इस के साथ साथ विश्व कर्मा/करमषट भी। गुरु का मतलब सतया गुरु नानक के अनुसार पवन/हवा/वायु होता है। आयुर्वेदा और अनुभवों के अनुसार वायु ही हमारे सभ दुखों और दर्दों का कारन भी है। इस लिए हमें निरोग और समृद्ध होने के लिए विश्व कर्मा/करमषट होना भी सभ से जरूरी है। इसी लिए पछमी लोग करमषट कोने के कारन आज सभ से जियादा सम्पन हैं और हम भारतीय सिर्फ बोलने और झूठे गियान में/अपने अहंकार की पुष्टि के लिए ही, पंडित बनना और अपने नशे में गलतान रहना ही चाहते हैं।
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