सूरज की कुदरत ।
पानी को सूरज भाफ बना कर बादल बनावे,
बादलों को ठंडा कर पानी और बर्फ, आकाश से गिरावे।
ये सारी किरिया कुदरत ही कर रही है कोई इंसान नहीं,
इंसान तो इस कुदरत की साइंस को समझ सकता है कोई होर नहीं।
कुदरत और असिस्तव को समझ कर हम कुदरत और असिस्तव के हो सकते है,
अपने दुखों के कारणों को समझ सकते हैं अपने मन और साइकोलॉजी को जान और समझ सकते हैं।
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