में कुदरत और असिस्तव का वह सिक्का हूँ।
में कुदरत और असिस्तव का वह सिक्का हूँ जिसके दो पहलु हैं। एक पहलु मन का भोग,विलास, आनंद,डार्कनेस,रोग,दुःख और बेहोशी का है दूसरा चेतना,अवेयरनेस,होश गियान, प्यूरिटी, निरोगता और वैलनेस का है।
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