में कौन हूँ ?
में पानी, हवा और सूर्य की रौशनी हूँ ,और नहीं हूँ कोई,
यह पानी ही आकाशों में जाकर, अहंकार की बिजली कड़कड़ाए ,और धूम धड़ाका मचाए।
फिर ठंडा हो कर, पानी की वर्षा या बर्फ बन कर धरती माता पर गिर जाए ,
धरती माता के भाग जगाए,हरी भरी करे और हर तरह के फूल और अनाजों का धन उगाए।
मेरा हमेशा से बस एक ही काम रहा है ,जीवों को रोज़ी,रोटी कपडा,शीतलता और काम धंदा देता रहूँ,
एहि मेरी भगति समझी जाए या मेरा प्रेम समझा जाए, में इसी कार्तवीय से सभ के अंदर समाया रहता हूँ और सभ जीवों से जुड़ा हुआ हूँ ।
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