सम्प्रदायकता और जातिवाद।
किसी भी धरम में सम्प्रदायकता और जातिवाद का होना ऐसे ही है जैसे किसी स्वस्थ शरीर में ज़हर का होना। सम्प्रदायकता और जातिवाद इंसानियत और प्रेम की जड़ें उखाड़ने वाले तत्व हैं,जो हर धरम के दूषण होने चाहियें ,लेकिन अब धरम की जगह पॉलिटिक्स ने लेली है धरम तो कहीं नज़र ही नहीं आता।
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