गरीबी और धरम।
जो देश गरीबी से और कर्रप्शन से नहीं निकल पा रहे हैं जैसे भारत, उनकी सरकारें लोगों को धरम और जाती के व्यर्थ के मसलों में उलझाके रखते हैं। हमारे जीवन की मौलिक जरूरतें रोजी,रोटी,शुद्ध पानी,शुद्ध हवा,कपडे,मकान,एजुकेशन,मेडिकल,जॉब की हैं और धरम लोगों को पाठ पूजाओं में उलझा रहे हैं। यह सभी धरम इन पॉलिटीशनों के एजेंट हैं। हज़ारों सालों से यह देश गरीबी और गुलामी को सहते चले आ रहे हैं पर इन के लीडरों को जनता की सुध बुध लेने का वकत ही नहीं है।
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