हम सभ एक जैसे हैं।
अगर हमारे अलग अलग धर्म और जाती के बाहरले बनावटी आवरण रंग रूप को हटा दें और इस के अंदर के शरीर के दर्शन करें तो हमें कोई भी फरक नहीं मिलेगा ,हम सभी एक जैसे ही मिलेंगे। यह सारे धर्मों और जातियों के बखेड़े शरारती किसम के और वेहलड़ लोगों के खड़े किये हुए हैं जो जीवन को शांत नहीं बल्कि हमेशा अशांत ही देहना चाहते हैं। इस मंतव्य से वह लोग कोई न कोई सिलसिला शुरू करके ही रखते हैं।
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