में किया हूँ ?
में ही मंदिर,में ही मस्जिद,में ही चर्च और गुरुदवारा हूँ,
मेरे सिवा सभ निर्जीव पत्थर हैं , में ही जीवन की मधुशाला हूँ।
मेरे में ही अग्नि शक्ति का वास है,मेरे में ही शीतल झरने बहते हैं,
मेरे में ही आनंद की झंकार बोलती है ,मेरे में ही सभ अनुभव होते हैं।
में ही आनंद का सागर हूँ,मेरे में सभ इच्छाएं पूर्ण होती हैं ,
में ही सभ इच्छाओं की पूर्ती करके इनसे मुक्ति पा सकता हूँ ।
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