यह शरीर का बोरा और गुब्बारा।
यह शरीर के बोरे को जब भोजन से भर दिया जाता है ,
पियास लगने पर, पानी से भी त्रिपत कर दिया जाता है।
बाकी के खाली गुब्बारे को हवा से भर दिया जाता है ,
इन सभी के इंटरेक्शन से जो थर्मल एनर्जी और गैस उत्पन होती है,उसी की अकड़न से इस में जान आ आती है।
इसी एनर्जी से हमारा खून बनता है जिसकी सर्कुलेशन शरीर के सेलों की खुराक बनती है, जिस का नाम जीवन दिया जाता है।
जब इस बोरे और गुब्बारे की थर्मल एनर्जी और अकड़न स्थिल पड़ने लग जाती है,तो बुढ़ापा कहलाता है ,
इस ३७ डिग्री सी -थर्मल एनर्जी और हवा की अकड़न निकल जाने से यह शरीर का बोरा ठंडा और बिलकुल कमजोर पड़ जाता है और मृत्यु को प्रपात हुआ कहलाता है।
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